ब्रह्माकुमारीज के दो दिवसीय योग साधना शिविर में लगभग 500 लोगों ने प्राप्त की गहन योगानुभूति
अंबिकापुर, 7 नवंबर 2026। ब्रह्माकुमारीज के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से पधारे प्रसिद्ध मोटिवेशनल वक्ता एवं प्रख्यात राजयोग प्रशिक्षक बी.के. रूपेश भाई के सानिध्य में ब्रह्माकुमारीज के स्थानीय सेवाकेंद्र नव विश्व भवन, चोपड़ापारा, अंबिकापुर में आयोजित दो दिवसीय विशेष योग साधना शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिविर के विभिन्न सत्रों में शहर के लगभग 500 लोगों ने सहभागिता कर राजयोग की गहन अनुभूतियां प्राप्त कीं।
शिविर के दौरान बी.के. रूपेश भाई ने योग के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया के लोग योग को अपनाकर अपने जीवन में शांति, खुशी, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त कर रहे हैं। योग हमारी भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। जब संपूर्ण विश्व योग की शक्ति को स्वीकार कर रहा है, तो हमें स्वयं भी इसका लाभ लेकर अपने जीवन को श्रेष्ठ और सकारात्मक बनाना चाहिए।
उन्होंने राजयोग की विशेष कमेंट्री के माध्यम से उपस्थित साधकों को परमात्म स्मृति एवं आत्मिक शांति की गहन अनुभूति कराई। साथ ही विशेष क्रिएटिव योगाभ्यास के माध्यम से यह सुंदर अनुभव कराया कि किस प्रकार हम अपने दैनिक जीवन एवं कार्यक्षेत्र में रहते हुए भी योगयुक्त रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि योग केवल एकांत में बैठकर ध्यान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चलते-फिरते, कार्य करते, परिवार एवं समाज के बीच रहते हुए भी मन को परमात्मा से जोड़कर रखना ही सच्चा योग है।
योगयुक्त, तनावमुक्त एवं खुशनुमा जीवन के सूत्र बताते हुए उन्होंने सत्संग, श्रेष्ठ विचार, शुभचिंतक एवं शुभचिंतन, ईश्वरीय सेवा तथा समर्पण भाव के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि सत्संग अर्थात श्रेष्ठ संगति और श्रेष्ठ ज्ञान का श्रवण मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। जैसी संगति और जैसा वातावरण हमें मिलता है, वैसा ही हमारे विचारों एवं व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमें सदैव ऐसे वातावरण में रहना चाहिए, जहां से सकारात्मकता, शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हो।
श्रेष्ठ विचारों को जीवन की वास्तविक पूंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे विचार ही हमारे व्यक्तित्व, व्यवहार और कर्मों का आधार बनते हैं। यदि विचार श्रेष्ठ होंगे तो बोल और कर्म भी श्रेष्ठ बनेंगे। इसी प्रकार शुभचिंतक बनना अर्थात प्रत्येक आत्मा के प्रति शुभभावना रखना और शुभचिंतन करना, स्वयं को भी तनाव एवं नकारात्मकता से मुक्त रखता है। दूसरों की कमियों को देखने के बजाय उनकी विशेषताओं को देखना और सभी के प्रति कल्याण की भावना रखना ही श्रेष्ठ जीवन की पहचान है।
ईश्वरीय सेवा के महत्व को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब हम अपने समय, संकल्प, गुणों और शक्तियों को विश्व कल्याण के निमित्त लगाते हैं, तो हमारे जीवन में आंतरिक संतुष्टि, आनंद और आत्मिक शक्ति का संचार होता है। वहीं समर्पण भाव हमें चिंता, भय, अहंकार और व्यर्थ संकल्पों से मुक्त करता है। अपनी समस्याओं एवं परिस्थितियों को परमात्मा के हवाले कर स्वयं श्रेष्ठ कर्म करते रहना ही सच्चे समर्पण की निशानी है। इन आध्यात्मिक सूत्रों को जीवन में अपनाकर व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी शांत, प्रसन्न और शक्तिशाली रह सकता है।
इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के महान जीवन एवं आदर्श आचरण से प्रेरणा लेते हुए पांच विशेष धारणाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
पांच विशेष धारणाएं
ब्रह्ममुहूर्त – प्रातःकाल अमृतवेला में जल्दी उठकर परमात्मा का ध्यान एवं राजयोग का अभ्यास करना। दिन की शुरुआत ईश्वरीय स्मृति से करने पर मन में शांति, पवित्रता और सकारात्मक संकल्पों की शक्ति आती है।
ब्रह्माज्ञान – प्रतिदिन प्रातः ईश्वरीय ज्ञान का श्रवण करना तथा उसका मनन एवं चिंतन करना। ज्ञान को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन के व्यवहार और कर्मों में उतारना आवश्यक है।
ब्रह्माभोजन – प्रतिदिन शुद्ध, सात्विक एवं पवित्र भोजन बनाना। भोजन तैयार करते समय ईश्वर की स्मृति रखना, पहले परमात्मा को भोग अर्पित करना और उसके पश्चात ईश्वरीय याद में भोजन स्वीकार करना। ऐसा भोजन मन को पवित्र, निर्मल एवं शक्तिशाली बनाने में सहयोगी होता है तथा जीवन में सात्विकता का संचार करता है।
ब्रह्मचर्य – मन, वचन और कर्म से पवित्रता को धारण करना। अपने संकल्पों, दृष्टि, वृत्ति और व्यवहार को श्रेष्ठ एवं मर्यादित बनाकर आत्मिक शक्ति का संचय करना।
ब्रह्माचारी – ब्रह्मा बाबा के समान श्रेष्ठ विचार, श्रेष्ठ बोल और श्रेष्ठ कर्म को अपने जीवन का आधार बनाना। अर्थात हर परिस्थिति में मर्यादाओं का पालन करते हुए ऐसा जीवन जीना, जिससे स्वयं के साथ-साथ दूसरों का भी कल्याण हो।
समय की पुकार – अब हो जाएं तैयार!
वर्तमान समय की परिस्थितियों का संकेत देते हुए बी.के. रूपेश भाई ने कहा कि आज समय की पुकार है – अब हो जाएं तैयार। चारों ओर दुख, अशांति, चिंता और भय का वातावरण दिखाई दे रहा है। प्राकृतिक आपदाओं एवं प्रकोपों की घटनाएं भी निरंतर बढ़ रही हैं। ऐसे नाजुक समय में योगी आत्माओं की विशेष जिम्मेदारी है कि वे अपनी श्रेष्ठ, शक्तिशाली एवं योगयुक्त स्थिति के द्वारा वातावरण में शांति, पवित्रता और शक्ति के वाइब्रेशन फैलाएं।
उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं परमात्म स्मृति में स्थित होकर शांति और शक्ति से संपन्न बनते हैं, तो हमारे संकल्पों एवं सकारात्मक वाइब्रेशन का प्रभाव आसपास के वातावरण पर भी पड़ता है। इसलिए अब केवल स्वयं के लिए योग करने का समय नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए योग शक्ति का प्रयोग करने का समय है, ताकि प्रकृति के पांचों तत्वों सहित विश्व की समस्त आत्माओं को ईश्वरीय शांति और शक्ति की अंजलि प्राप्त हो सके।
भावपूर्ण विदाई एवं अतिथि का सम्मान
शिविर के समापन अवसर पर बी.के. रूपेश भाई एवं अंबिकापुर सेवाकेंद्र की संचालिका राजयोगिनी बी.के. विद्या दीदी ने सभी उपस्थित साधकों को ईश्वरीय वरदान एवं प्रसाद प्रदान किया तथा शक्तिशाली रूहानी दृष्टि देकर सभी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं। शिविर में प्राप्त योग की गहन एवं सुंदर अनुभूतियों के लिए उपस्थित लोगों ने बी.के. रूपेश भाई के प्रति हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अमोलक सिंह ढिल्लों, आर्ट ऑफ लिविंग के श्री अजय तिवारी, उप पुलिस अधीक्षक श्री राकेश बघेल, डाइट के प्रिंसिपल के.सी. गुप्ता, सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता श्री सुनील रवि एवं श्री सुरेंद्र दुबे सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने बी.के. रूपेश भाई का शाल एवं श्रीफल भेंटकर आत्मीय सम्मान किया।
कार्यक्रम में श्रीमती वंदना दत्ता, उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती महालक्ष्मी सहित शहर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिक, समाजसेवी एवं ब्रह्माकुमारीज से जुड़े भाई-बहन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पूर्व नवा बिहान टीम सामाजिक कार्यकर्ता मंगल पांडे, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता वंदना दत्ता, हिना खान, अमृत भाई, संतोष विश्वकर्मा तथा अजय तिवारी के साथ विशेष रूप से युवाओं को नशे से कैसे मुक्त किया जाए इस विषय पर चर्चा हुई।
दो दिवसीय इस विशेष योग साधना शिविर ने उपस्थित लोगों को राजयोग के माध्यम से स्वयं को शांत, शक्तिशाली, सकारात्मक एवं तनावमुक्त बनाने की प्रेरणा दी। शिविर का मुख्य संदेश यही रहा कि जब हमारा मन शांत होगा, संकल्प श्रेष्ठ होंगे और जीवन परमात्म स्मृति से जुड़ा होगा, तभी हम स्वयं के साथ-साथ विश्व में भी शांति एवं सकारात्मकता का प्रकाश फैला सकेंगे।





