अंबिकापुर, 4 नवंबर 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से पधारे प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता, राजयोग प्रशिक्षक एवं पीस ऑफ माइंड टीवी (PMTV) के लोकप्रिय एंकर बी.के. रूपेश भाई के सानिध्य में अंबिकापुर में विशेष दो दिवसीय गहन योग साधना शिविर का शुभारंभ आज 4 नवंबर 2026 को नव विश्व भवन, चोपड़ापारा में आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ।

इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज अंबिकापुर सेवाकेंद्र की संचालिका राजयोगिनी बी.के. विद्या दीदी, आर्ट ऑफ लिविंग के प्रभारी श्री अजय तिवारी, वरिष्ठ पार्षद श्री रमेश जायसवाल एवं उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती महालक्ष्मी बहन ने पुष्पगुच्छ भेंटकर बी.के. रूपेश भाई का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
अंबिकापुर से प्रारंभ हुई आध्यात्मिक यात्रा, आज अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आध्यात्मिक सेवाओं का विस्तार
स्वागत सत्र में सेवाकेंद्र संचालिका बी.के. विद्या दीदी ने बी.के. रूपेश भाई का परिचय देते हुए कहा कि यह अंबिकापुर के लिए विशेष गौरव एवं हर्ष का विषय है कि आध्यात्मिक जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले रूपेश भाई की आध्यात्मिक यात्रा इसी अंबिकापुर की पावन धरा से ब्रह्माकुमारीज संस्था के संपर्क में आने के साथ प्रारंभ हुई थी। यहीं से उन्होंने ईश्वरीय ज्ञान एवं राजयोग की शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की। आज अपनी प्रतिभा, समर्पण एवं ईश्वरीय सेवाभाव के माध्यम से वे देश-विदेश में आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश प्रसारित कर रहे हैं।
बी.के. रूपेश भाई ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मीडिया एवं आध्यात्मिक प्रसारण क्षेत्र का एक जाना-पहचाना नाम हैं। एक कुशल मंच संचालक, प्रभावशाली संवादकर्ता एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी सहज संवाद शैली, विषय को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाने की कला तथा श्रोताओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करने की विशेषता उन्हें विशिष्ट बनाती है।
योग तपस्या अर्थात स्वयं के भीतर की ओर लौटना, मन-बुद्धि को एकाग्र करना – बी.के. रूपेश भाई
कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र में बी.के. रूपेश भाई ने दो दिवसीय गहन योग तपस्या शिविर का आध्यात्मिक लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि तपस्या का वास्तविक अर्थ है अपने भीतर की ओर जाना। संसार की भागदौड़ में भटकते हुए अपने मन और बुद्धि को पुनः एकाग्र करना तथा आत्मिक शक्ति को जागृत करना।
उन्होंने भट्ठी के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमें अपने भीतर छिपे विकारों रूपी भूतों को बाहर निकालना है। मन में व्याप्त काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार एवं अन्य नकारात्मक संस्कारों से स्वयं को मुक्त करना है। परमात्मा के सानिध्य में रहकर अपने मन और बुद्धि को संसार के बोझ से मुक्त करना है तथा स्वयं को ईश्वरीय गुणों और शक्तियों से परिपूर्ण बनाना है।
उन्होंने कहा कि इस योग तपस्या का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अपने श्रेष्ठ भविष्य का निर्माण करना भी है। जब मनुष्य अपने संकल्पों को श्रेष्ठ बनाता है, बुद्धि को सकारात्मक दिशा देता है और परमात्मा से योगयुक्त होकर जीवन व्यतीत करता है, तब उसके व्यक्तित्व में दिव्यता एवं श्रेष्ठता का विकास होने लगता है।
बी.के. रूपेश भाई ने उपरोक्त सभी बिंदुओं को विस्तारपूर्वक आध्यात्मिक उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करते हुए उपस्थित भाई-बहनों को आत्मनिरीक्षण, मनन एवं चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में धारण करना और उसका अनुभव करना ही वास्तविक पुरुषार्थ है।

ईश्वरीय ज्ञान से जीवन बनता है ज्ञानवान, धनवान, चरित्रवान एवं गुणवान
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान में परमात्मा द्वारा दिए जा रहे ईश्वरीय ज्ञान एवं राजयोग की शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व का आध्यात्मिक उत्थान करना है। इस ज्ञान के माध्यम से मनुष्य ज्ञानवान बनता है, ईश्वरीय शक्तियों एवं गुणों के आध्यात्मिक खजाने से धनवान बनता है, श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करता है तथा अपने जीवन को दिव्य गुणों से संपन्न बनाता है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस दो दिवसीय योग साधना शिविर को केवल एक कार्यक्रम न समझें, बल्कि इसे स्वयं को बदलने, आत्मिक शक्तियों को जागृत करने तथा परमात्मा से निकटता का अनुभव करने का एक श्रेष्ठ अवसर बनाएं।
उन्होंने प्रेरित किया कि कुछ समय संसार की बाहरी गतिविधियों से स्वयं को अलग कर अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा का अनुभव करें और परमात्मा से संबंध जोड़कर अपने जीवन में शांति, प्रेम, पवित्रता, सुख एवं आनंद की अनुभूति करें।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित सभी भाई-बहनों में विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक उमंग दिखाई दी। अंबिकापुर के लिए यह विशेष सौभाग्य का विषय है कि जिस शहर से बी.के. रूपेश भाई की आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ, आज उसी शहर में वे अपने अनुभवों एवं योग तपस्या की विधियों के माध्यम से अनेक आत्माओं को आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न बनाने के लिए पहुंचे हैं।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
अंबिकापुर, जिला सरगुजा (छत्तीसगढ़)
