अंबिकापुर में धूमधाम से संपन्न हुआ ‘दिल से डांडिया’, मल्लिका सिंह ने लगाया नारा—‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’
अंबिकापुर में ‘दिल से डांडिया’ कार्यक्रम में मल्लिका सिंह राधा रानी के रूप में पहुंचीं और ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा लगाया। सनहरा सवेरा के संपादक संतोष कुमार विश्वकर्मा और सह-संपादक मुकेश कुमार निराला भी शामिल हुए।
अंबिकापुर। सरगुजा की नगरी अंबिकापुर में आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘दिल से डांडिया’ उत्साह, उमंग और भक्ति के रंगों के साथ शानदार तरीके से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में लोकप्रिय अभिनेत्री मल्लिका सिंह राधा रानी के मनमोहक रूप में पहुंचीं। उनकी मौजूदगी ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
मल्लिका सिंह ने लगाया ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा
कार्यक्रम का सबसे खास पल तब देखने को मिला, जब मल्लिका सिंह ने छत्तीसगढ़िया अंदाज में ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा लगाया। उनके मुंह से छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़ा यह लोकप्रिय नारा सुनकर वहां मौजूद लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई। तालियों और जोश के बीच यह पल आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गया।
मल्लिका सिंह को अंबिकापुर का माहौल और यहां के लोगों का अपनापन बेहद पसंद आया। उन्होंने छत्तीसगढ़िया बोली के प्रति अपना लगाव भी जाहिर किया। उनके इस आत्मीय अंदाज ने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। राधा रानी के रूप में उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।
सनहरा सवेरा के संपादक और सह-संपादक भी हुए शामिल
‘दिल से डांडिया’ कार्यक्रम में सनहरा सवेरा के संपादक संतोष कुमार विश्वकर्मा और सह-संपादक मुकेश कुमार निराला भी शामिल हुए। दोनों ने इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कार्यक्रम का आनंद लिया।
परिवार सहित पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
इस सांस्कृतिक आयोजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Additional SP) भी अपने परिवार के साथ पहुंचे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। शहरवासियों ने भी उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया और डांडिया, संगीत तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद उठाया।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अपनापन बना आयोजन की पहचान
‘दिल से डांडिया’ ने अंबिकापुर में मनोरंजन के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, परंपरा और आपसी जुड़ाव की खूबसूरत झलक पेश की। मल्लिका सिंह का ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ का नारा इस आयोजन की खास याद बन गया। छत्तीसगढ़िया बोली और यहां के लोगों के प्रति उनका लगाव उपस्थित लोगों के लिए खुशी का क्षण रहा।
इस तरह ‘दिल से डांडिया’ का आयोजन अंबिकापुर में सांस्कृतिक उल्लास, उत्साह और यादगार पलों के साथ संपन्न हुआ।
सनहरा सवेरा | अंबिकापुर, छत्तीसगढ़