मैनपाट

मेहता पॉइंट की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल, पर्यटकों से शुल्क वसूली के बीच सुविधाएं नदारद !

मैनपाट। छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट की खूबसूरत वादियां हर साल देशभर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। लेकिन पर्यटन स्थल मेहता पॉइंट की मौजूदा स्थिति पर्यटकों को निराश करने वाली है। यहां व्यवस्थाओं के अभाव और कथित अनियमित शुल्क वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पर्यटकों का आरोप है कि मेहता पॉइंट में प्रवेश के नाम पर अलग-अलग राशि वसूली जा रही है। बताया जा रहा है कि 20 रुपये से लेकर 150 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन कई पर्यटकों को इसकी बाकायदा रसीद नहीं दी जाती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह शुल्क किस नियम और किस प्रक्रिया के तहत वसूला जा रहा है।

टेंडर खत्म, फिर भी शुल्क वसूली के आरोप

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल मेहता पॉइंट के संचालन और टेंडर प्रक्रिया पर है। जानकारी के मुताबिक, यहां का पूर्व टेंडर करीब छह महीने पहले समाप्त हो चुका है। ऐसे में यदि बिना नई टेंडर प्रक्रिया के पर्यटकों से शुल्क वसूला जा रहा है, तो इसकी वैधता और जिम्मेदारी को लेकर जांच की जरूरत है।

स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि लंबे समय से मेहता पॉइंट के रखरखाव के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। पर्यटन स्थल पर न तो पर्याप्त साफ-सफाई नजर आती है और न ही पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं।

झूले गायब, जर्जर शेड और बदहाल इंतजाम

मेहता पॉइंट में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे झूले भी अब नजर नहीं आते। वहीं कई जगहों पर शेड की हालत खराब है और छत से पानी टपकने की शिकायत सामने आ रही है। पर्यटकों का सवाल है कि जब उनसे प्रवेश या अन्य सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, तो उस राशि के बदले बुनियादी सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थिति आज की नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से बनी हुई है। उनका कहना है कि समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता।

स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें

कुछ पर्यटकों ने मेहता पॉइंट में तैनात कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है। आरोप है कि शुल्क को लेकर सवाल करने या रसीद मांगने पर कई बार पर्यटकों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और बत्तमीजी की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और जिम्मेदार पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है।

पर्यटन विकास के दावों पर सवाल

एक तरफ सरकार मैनपाट को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने और यहां पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने की बात कर रही है, वहीं मेहता पॉइंट की बदहाल तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

मामले में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की बात कही है। अब देखना होगा कि इन निर्देशों के बाद मेहता पॉइंट में शुल्क वसूली की प्रक्रिया की जांच होती है या नहीं, कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं कब मिलती हैं।

मैनपाट की प्राकृतिक खूबसूरती आज भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, लेकिन मेहता पॉइंट की बदहाल व्यवस्था और कथित शुल्क वसूली ने पर्यटन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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