फिल्मों और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर गाली-गलौज, अश्लील दृश्यों और हिंसक संवादों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस विषय पर उठ रही आपत्तियों में कहा गया है कि मनोरंजन सामग्री में भद्दी भाषा का अनावश्यक प्रयोग बच्चों और किशोरों की भाषा, व्यवहार तथा सामाजिक समझ पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
बच्चों और परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता
चिंता जताने वालों का कहना है कि बच्चे और युवा फिल्मों तथा वेब सीरीज के संवादों की नकल कर सकते हैं। इससे भाषा और व्यवहार में बदलाव आने की आशंका रहती है। कई दर्शकों के लिए परिवार के साथ बैठकर सामग्री देखना भी मुश्किल हो सकता है, यदि उसमें बार-बार अपशब्द या अश्लील दृश्य हों।
कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ दर्शकों की उम्र, सामाजिक जिम्मेदारी और भाषा की मर्यादा पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
सख्त रेटिंग और जिम्मेदार निगरानी की मांग
इस मुद्दे पर रखी जा रही मांगों में फिल्मों और वेब सीरीज में अत्यधिक तथा अनावश्यक गाली-गलौज के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश, उम्र के अनुरूप स्पष्ट कंटेंट रेटिंग और जरूरत पड़ने पर उचित संपादन शामिल हैं। साथ ही, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी और बच्चों के लिए बेहतर सुरक्षा विकल्प उपलब्ध कराने की अपेक्षा की जा रही है। किसी सामग्री पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही तय किए जाने चाहिए।
अभिभावकों की भूमिका भी अहम
अभिभावकों से अपील की जाती है कि वे बच्चों की उम्र के अनुसार फिल्मों और कार्यक्रमों का चयन करें, पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें और बच्चों के साथ डिजिटल सामग्री को लेकर बातचीत करें। परिवार में सकारात्मक भाषा और जिम्मेदार डिजिटल आदतों को प्रोत्साहित करना भी जरूरी है।
मनोरंजन का उद्देश्य दर्शकों को आकर्षित करने के साथ जिम्मेदारी निभाना भी है। बच्चों और युवाओं के हितों की रक्षा करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्पष्ट रेटिंग और जिम्मेदार कंटेंट निर्माण के बीच संतुलन बनाए रखने पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
