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एमसीबी के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी का आरोप, मरीजों की जेब पर पड़ रहा अतिरिक्त भार

अस्पताल की पर्ची लेकर मेडिकल दुकानों तक पहुंच रहे मरीज, स्वास्थ्य विभाग की दवा आपूर्ति व्यवस्था पर उठे सवाल

एमसीबी, 9 अगस्त। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जिले के कुछ सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि चिकित्सक से उपचार कराने के बाद जब अस्पताल के दवा वितरण केंद्र पर पहुंचते हैं, तो कई दवाएं नहीं मिलतीं। ऐसे में उन्हें निजी मेडिकल दुकानों से दवा खरीदनी पड़ रही है।

सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य ही यह है कि आम नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को कम खर्च में उपचार और जरूरी दवाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन अस्पताल में दवा नहीं मिलने की स्थिति में मरीजों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ रही है, जिससे इलाज का खर्च बढ़ रहा है।

पर्ची हाथ में, दवा के लिए बाजार का रुख

मरीजों के मुताबिक डॉक्टर द्वारा लिखी गई कुछ दवाएं अस्पताल के स्टोर या वितरण केंद्र में उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है। इसके बाद परिजन बाहर की दुकानों से दवा खरीदने को मजबूर होते हैं। रोजमर्रा की आय पर निर्भर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है।

हालांकि सभी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की स्थिति एक जैसी है या नहीं, इसे लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्ट स्थिति सामने आना बाकी है। ऐसे में अस्पतालवार स्टॉक की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

सप्लाई सिस्टम पर उठे सवाल

दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अस्पतालों में स्टॉक की नियमित समीक्षा और आवश्यकता के अनुसार मांग भेजने की व्यवस्था होती है। इसके बावजूद यदि जरूरी दवाएं खत्म हो रही हैं, तो समय रहते उनकी आपूर्ति क्यों नहीं हो पाई, यह बड़ा सवाल है।

क्या संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों ने समय पर मांग भेजी? क्या दवाओं की आपूर्ति में देरी हुई? या फिर स्टॉक प्रबंधन में लापरवाही हुई? इन सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

व्यवस्था की समीक्षा जरूरी

मरीजों और उनके परिजनों ने जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों से सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। साथ ही जिन दवाओं की कमी है, उनकी तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर हैं। यदि दवाओं की कमी की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदारी तय करने के साथ ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत होगी, जिससे मरीजों को इलाज के बाद दवा लेने के लिए निजी मेडिकल दुकानों का सहारा न लेना पड़े।

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